August 30, 2026
Mid-Day Meal Scam: शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, रजिस्टर और ऐप की हाजिरी में मिला अंतर तो नपेंगे स्कूल हेड
चंडीगढ़ (Media Jagat Desk): सरकारी स्कूलों में चल रही मिड-डे-मील (Mid-Day Meal) योजना में अब फर्जीवाड़ा करना मुमकिन नहीं होगा। शिक्षा निदेशालय ने लाभार्थी विद्यार्थियों की हाजिरी में होने वाली गड़बड़ियों पर नकेल कसने के लिए निगरानी व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया है।
अब कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्रों की दैनिक उपस्थिति केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसकी डिजिटल और मैनुअल दोनों स्तरों पर क्रॉस-चेकिंग की जाएगी। स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर, पीएम पोषण ऐप (PM Poshan App) और एमआईएस पोर्टल (MIS Portal) पर दर्ज आंकड़ों का रोजाना मिलान होगा। यदि इन तीनों जगह दर्ज संख्या में कोई भी अंतर पाया गया, तो सीधे तौर पर स्कूल मुखिया (Principal/Head) की जवाबदेही तय होगी और उन पर गाज गिरेगी।
ऐसे तय होगी जिम्मेदारी (Class Teacher से School Head तक)
नई पारदर्शी व्यवस्था के तहत एक पूरी चेन बनाई गई है, ताकि हर स्तर पर आंकड़ों की शुद्धता बनी रहे:
कक्षा अध्यापक: प्रतिदिन अपनी कक्षा के उपस्थित विद्यार्थियों की गिनती कर मिड-डे-मील इंचार्ज को रिपोर्ट सौंपेंगे।
मिड-डे-मील इंचार्ज: अध्यापक के हस्ताक्षर के बाद कुल योग रजिस्टर में दर्ज करेंगे।
स्कूल मुखिया: इस पूरे रिकॉर्ड पर स्कूल मुखिया के अंतिम हस्ताक्षर होंगे, जो पीएम पोषण ऐप पर हाजिरी अपडेट करने का मुख्य आधार बनेगा।
इसके साथ ही, एमआईएस पोर्टल पर हर बच्चे की व्यक्तिगत हाजिरी भी अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी।
अधिकारियों का डेली टास्क: रोजाना 5 स्कूलों की रैंडम जांच
गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करने के लिए विभागीय स्तर पर भी सख्ती बरती जा रही है।
खंड शिक्षा अधिकारी (BEO): हर ब्लॉक के बीईओ को रोजाना रैंडम आधार पर कम से कम 5 स्कूलों का चयन कर वहां के मिड-डे-मील हाजिरी रजिस्टर की प्रति मंगवाकर जांच करनी होगी।
डिप्टी डीईओ (Deputy DEO): जिले के डिप्टी डीईओ भी अलग से रोजाना 5 स्कूलों की रैंडम जांच करेंगे। एक ही दिन में ब्लॉक और जिला स्तर पर होने वाली इस दोहरी जांच से फर्जी आंकड़ों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड्स पर रहेगी पैनी नजर
शिक्षा निदेशालय ने साफ कर दिया है कि जांच सिर्फ कागजी रजिस्टरों तक सीमित नहीं रहेगी। एमआईएस पोर्टल पर दर्ज व्यक्तिगत उपस्थिति और पीएम पोषण ऐप पर दर्ज कुल संख्या का डिजिटल माध्यम से रोजाना मिलान किया जाएगा। यदि डिजिटल और मैनुअल आंकड़ों में जरा भी हेरफेर मिला, तो तुरंत विभागीय जांच बैठाई जाएगी।
लापरवाही पर नहीं मिलेगी कोई छूट
निदेशालय की ओर से सभी स्कूल मुखियाओं को सख्त हिदायत दी गई है कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की त्रुटि, लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर स्कूल मुखिया को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जांच के दायरे में कक्षा अध्यापक और मिड-डे-मील इंचार्ज भी शामिल होंगे। यह नई व्यवस्था मिड-डे-मील योजना में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।