December 28, 2025
बड़ी खबर: 20 साल की सेवा के बाद कर्मचारियों को 'कच्चा' रखना गैर-कानूनी, हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला!
चंडीगढ़ / मीडिया जगत डिजिटल डेस्क: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने कच्चे कर्मचारियों और दैनिक वेतन भोगियों (Daily Wagers) के हक में एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो आने वाले समय में नजीर बनेगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी कर्मचारी ने विभाग में दो दशक (20 साल) तक अपनी सेवाएं दी हैं, तो उसे अब 'अस्थायी' नहीं रखा जा सकता।
जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने हरियाणा सरकार के वन विभाग से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश जारी किया।
"सरकार का रवैया मनमाना और भेदभावपूर्ण"
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दशकों तक सेवा लेने के बाद भी कर्मचारियों को पक्का (Regularize) करने से इनकार करना सरकार का मनमाना और भेदभावपूर्ण रवैया है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा नहीं उठा सकती।
20 साल का शोषण बर्दाश्त नहीं: कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी राज्य की जानकारी और सहमति से 20 साल से अधिक सेवा दे चुके हैं, तो उन्हें नियमितीकरण (Regularization) से वंचित नहीं किया जा सकता।
बहाने नहीं चलेंगे: सरकार ने तर्क दिया था कि 'सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है', 'पद खाली नहीं हैं' या '2007 में नीति वापस ले ली गई थी'। कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
समान काम, समान अधिकार: जब समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को पहले ही पक्का किया जा चुका है, तो इन याचिकाकर्ताओं के साथ भेदभाव क्यों?
सभी लाभ देने होंगे: हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि सभी याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी 'परिणामी लाभ' (Consequential Benefits) दिए जाएं।
यह फैसला लगभग 50 याचिकाओं पर एक साथ सुनाया गया। ये याचिकाएं उन मजदूरों द्वारा दायर की गई थीं, जो वर्ष 2000 के शुरुआती दौर से वन विभाग में कार्यरत थे। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि इन कर्मचारियों को अपने हकों के लिए दशकों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़े, जबकि ये हक उन्हें बहुत पहले मिल जाने चाहिए थे।