April 18, 2026
Fatehabad News: एस.एस. जैन सभा में श्रद्धापूर्वक मनी अक्षय तृतीया, मुनि श्री अनुपम जी महाराज ने बताया गन्ने के रस से पारणा का रहस्य
फतेहाबाद (Media Jagat Desk): भारतीय संस्कृति में दान, पुण्य और तपस्या के सबसे महान पर्व 'अक्षय तृतीया' की धूम फतेहाबाद में भी देखने को मिली। श्याम नगर स्थित एस.एस. जैन सभा में इस पावन अवसर पर एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूज्य अनुपम मुनि जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उमड़कर धर्म लाभ उठाया और गन्ने के रस से पारणा कर पुण्य अर्जित किया।
गन्ने के रस से पारणा का क्या है महत्व?
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य अनुपम मुनि जी महाराज ने अक्षय तृतीया के गूढ़ रहस्यों और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुनि श्री ने बताया कि जैन धर्म में इस दिन का विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि आज ही के दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी ने अपने एक वर्ष की कठोर तपस्या के बाद श्रियांस कुमार के हाथों गन्ने का रस ग्रहण कर पारणा किया था। यह केवल एक सामान्य पारणा नहीं था, बल्कि त्याग, संयम और तप की एक ऐसी महान परंपरा की शुरुआत थी, जिसका अनुसरण आज भी लाखों श्रद्धालु व्रत और आराधना करके करते हैं।
हिंदू धर्म में भी है अक्षय तृतीया का विशेष स्थान
मुनि श्री ने बताया कि केवल जैन धर्म ही नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में भी अक्षय तृतीया का व्यापक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इसी शुभ दिन पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का अवतरण हुआ था। इसके साथ ही यह मान्यता भी है कि भगवान श्री गणेश ने महर्षि वेदव्यास जी के साथ मिलकर इसी पावन मुहूर्त में महान ग्रंथ 'महाभारत' का लेखन कार्य आरंभ किया था।
गन्ने का जूस वितरित और तपस्वियों का हुआ सम्मान
प्रवचनों के समापन के बाद, मुनि श्री के सान्निध्य में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को गन्ने के रस से पारणा करवाया गया और सभी के लिए गन्ने का जूस भी वितरित किया गया। मुनि श्री ने सभी से धर्म, दान और त्याग के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में एस.एस. जैन सभा के प्रधान सुरेंद्र मित्तल और पूरी कार्यकारिणी का विशेष योगदान रहा।
वर्षीतप का महान संकल्प: समाज के लिए प्रेरणा
इस अवसर पर श्याम नगर जैन समाज के लिए एक बेहद गर्व का क्षण भी आया। समाज के बिनोद सोनी और तपस्विनी श्रीमती कविता ने 'वर्षीतप' का महान और कठिन संकल्प धारण किया है। जैन सभा ने उनके इस त्याग और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका यह कदम पूरे समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है और इससे समाज का गौरव बढ़ा है।
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