January 17, 2026
1 सेकंड नहीं, 'निमिष' था हमारा पैमाना! जानिए क्या है 'घड़ी' और 'प्रहर' का असली विज्ञान?
नई दिल्ली (Media Jagat Desk): हम अक्सर अपने बुज़ुर्गों से सुनते आए हैं- "बस दो घड़ी रुक जाओ" या "दोपहर हो गई है"। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अंग्रेजों की 'घड़ी' (Watch) आने से पहले भारत में समय कैसे देखा जाता था?
आज हम आपको भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित उस वैदिक काल गणना (Vedic Timekeeping) के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आज के 'नैनो सेकंड' से भी ज्यादा सूक्ष्म और सटीक थी। यह केवल धर्म नहीं, बल्कि एक उन्नत विज्ञान था।
सेकंड नहीं, 'पल' और 'विपल' थे आधार आज हम समय को घंटों और मिनटों में मापते हैं, लेकिन सनातन संस्कृति में दिन की शुरुआत सूर्योदय से मानी जाती थी। हमारी गणना इतनी बारीक थी कि पलक झपकने के समय का भी हिसाब रखा जाता था।
यहाँ समझें प्राचीन और आधुनिक समय का तुलनात्मक चार्ट:
1. दैनिक जीवन की इकाइयाँ (Daily Units): दैनिक कार्यों और ज्योतिष में इन इकाइयों का सबसे ज्यादा महत्व है:
विपल (Vipala): यह समय का बहुत छोटा हिस्सा है। (लगभग 0.4 सेकंड)।
पल (Pala): 60 विपल मिलकर 1 पल बनाते हैं। आधुनिक घड़ी के हिसाब से यह 24 सेकंड का समय है। इसे 'विघटी' भी कहा जाता है।
घड़ी (Ghadi): 60 पल मिलकर 1 घड़ी बनाते हैं। यानी 1 घड़ी = 24 मिनट।
मुहूर्त (Muhurta): 2 घड़ियां मिलकर एक मुहूर्त बनाती हैं (करीब 48 मिनट)। पूरे दिन-रात में कुल 30 मुहूर्त होते हैं।
'दोपहर' शब्द का असली मतलब क्या है? हम रोज़ 'दोपहर' शब्द बोलते हैं, लेकिन इसका अर्थ कम ही लोग जानते हैं। दरअसल, वैदिक समय में 3 घंटे का एक 'प्रहर' (Prahar) होता था।
दिन में 4 प्रहर होते हैं।
रात में 4 प्रहर होते हैं।
जब दिन के दो प्रहर बीत जाते हैं (करीब 12 बजे के बाद), तो उसे 'दो-प्रहर' (दोपहर) कहा जाता है।
विज्ञान को भी मात देती 'सूक्ष्म इकाइयाँ' हमारे पूर्वजों ने समय को केवल मिनटों में नहीं, बल्कि सेकंड के हज़ारवें हिस्से में भी मापा था:
निमिष (Nimesha): इंसान के पलक झपकने में जो समय लगता है, उसे 'निमिष' कहते हैं (लगभग 0.2 सेकंड)।
त्रुटी (Truti): यह समय की सबसे छोटी इकाई है (सेकंड का 33,750वां भाग)। इतनी सूक्ष्म गणना आज की आधुनिक घड़ियाँ भी मुश्किल से कर पाती हैं।
घंटा (Hour) बनाम घड़ी (Ghadi) अंग्रेजों के आने के बाद हम 'घंटा' (Hour) का उपयोग करने लगे, जिसमें 60 मिनट होते हैं। जबकि हमारी भारतीय पद्धति में:
निष्कर्ष: यह गणना सिद्ध करती है कि सनातन विज्ञान कितना उन्नत था। अगली बार जब कोई कहे "दो घड़ी रुको", तो समझ जाइएगा कि वो आपसे लगभग 48 मिनट मांग रहा है!
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